जाने कौन है केप्टन (डॉ) आदर्श किशोर जाणी,जिनकी एक आवाज "कैडेट थम" से एकाएक शांत हो जाती है सुबह
एक अभिनव उदाहरण--राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर का मैदान,समय सुबह के 4.30 मिनट,एक लंबी सिटी की आवाज के साथ एक नई सोच और कुछ कर गुजरने के उद्देश्य से एक साथ कदमो की एक संगीतमय कदमताल सुनाई पड़ती है। सुनसान सुबह को चीरती हुई आवाज "कैडेट थम" कहते ही एकाएक शांत हो जाती है।
एक विशेष आवाज जो आज हर किसी मजबूर विद्यार्थी के सपनों को साकार करने का दम भरती है। पूरा बाड़मेर उस मंद मुस्कान भरे चेहरे के पीछे छिपे गहरे राज को जानता है, शायद कुछ कर गुजरने की गहन तम्मना उसे सोने नहीं देती है और फिर सफर का आगाज शुरू हो जाता है।
वर्षों पहले मैंने बिहार के आनंद कुमार और एक आईपीएस की कहानी पढ़ी जो "सुपर 30" नाम से एक संस्थान चलाते थे और वास्तव में 30 बच्चो को लेकर उनको ही टारगेट करके वास्तव में सुपर बनाने का जज्बा लेकर अपने कार्य की परिणीति करते थे।
ऐसा ही मिलता जुलता एक उदाहरण आजकल सदा अकालों और अभावों से जूंझने वाले बाड़मेर जिले में भी देखने को मिल रहा है।
राजकीय महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफ़ेसर केप्टन (डॉ) आदर्श किशोर जाणी जिन्होंने कि बहुत ही छोटी उम्र पहले तो स्वयं बहुत अच्छा मुकाम हासिल किया और उनके स्वर्गीय पिताजी समाजसेवी श्री उमाराम जी जाणी साहब के सपनो को आज भी जिवंत रूप प्रदान करने का काम कर रहे है। अनेक विद्यार्थियों का अब तक राजकीय सेवा में चयन करवा चुके है और आज भी अनवरत प्रयासरत है।डॉ साहब सुबह 4.30 बजे उठकर उसी कॉलेज मैदान में आ डटते है जहाँ उनके साथ 100-150 जवान बालक जो कि गरीब, असहाय और महाविद्यालय परिवार से जुड़े है लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण महँगी कोचिंग क्लास नहीं जा सकते। ऐसे अनेक विद्यार्थियों के सपनो तारणहार और उनके सपनो में संजीवनी बूटी भरने का विश्वास लेकर अपने कर्तव्य पथ पर निकल पड़ते है।आज के इस स्वार्थ परक ज़माने में जहाँ इंसान के लिए पैसा ही सब कुछ है, उस परिदृश्य में सकारात्मक भावना के साथ सब कुछ निःशुल्क सेवा देने का भाव अगर कहीं देखना हो तो वो जीती जागती मूरत अपने बाड़मेर में ही मिल जायेगी। बस विद्यार्थी का जज्बा जिवंत होना चाहिए और लक्ष्य एक ही होना चाहिए फिर परिणीति होने में डॉ साहब कोई कमी नहीं रखते।उनके प्रयास के बलभूते ही उनकी टीम अविरल रूप से बढ़ती जा रहीहै उनके प्रयास का ही नतीजा है कि आज हर कोई अपनी सेवा देने को तत्पर रहता है।
समय-समय पर यहीं से राजकीय सेवा में चयनितऔर अन्य चयनित मोटिवेशन करने को तत्पर रहते है।बाड़मेर ncc और "उजास" संस्थान के बैनर तले ऐसा काम वास्तव में काबिले तारीफ है।
संदर्भ: जेठाराम पचार लोहारवा







