कुछ ऐसा लिखूँ अपनी लेखनी से कि
हर किसान के रक्त में उबाल ला दूँ
कुछ ऐसा करूँ आंदोलन कि
हर सोये किसान का अभिमान जगा दूँ
माँ भारती करना ऐसी कुछ कृपा कि
अपने हर एक किसान भाई को उसका मान सम्मान दिला दूँ
और अपने लहू की हर एक बूँद को
किसान भाइयो के इतिहास की स्याही बना दूँ
खुद मिट जाऊ किसानों के सम्मान की राह पे
पर इतना साथ देना इस  बुरडक को कि
अपने किसान भाइयो के हर एक दुश्मन को
कलम रूपी तलवार की भेट चढ़ा दूँ...
पत्रकार जीतू बुरडक

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