*जय तेजाजी की बंधुओं..*
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पूर्व पोस्ट में हमने *तेजाजी के पूर्वजों* के बारे में संक्षिप्त जानकारी पढी कि वीर तेजाजी महाराज के पूर्वज किस वंश शाखा से संबंधित थे तथा कैसे मध्य भारत से चलकर मारवाड़ में अपने संघर्ष व बाहुबल के आधार पर जायल-धौळीडेह होते हुए खरनाल में गणराज्य स्थापित किया।
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पूर्व पोस्ट में हमने *तेजाजी के पूर्वजों* के बारे में संक्षिप्त जानकारी पढी कि वीर तेजाजी महाराज के पूर्वज किस वंश शाखा से संबंधित थे तथा कैसे मध्य भारत से चलकर मारवाड़ में अपने संघर्ष व बाहुबल के आधार पर जायल-धौळीडेह होते हुए खरनाल में गणराज्य स्थापित किया।
जैसा कि पूर्व विदित है *वीर तेजाजी महाराज के षड़दादा श्री उदयराज जी* ने खरनाल परगने पर आधिपत्य कर उसे अपने गणराज्य की राजधानी बनाया।
तत्पश्चात *नरपाल जी, कामराज जी, बक्शाजी अथवा बोहितराज तथा ताहड़ जी* ने गणराज्य का शासन भार संभाला।
नरपाल जी व कामराज जी की शासनावधि अल्पसमय ही रही।
तत्पश्चात बोहितराज जी ने शासन भार संभाला। बोहितराज कितने भाई थे तथा उन्होने कब से शासन कार्य शुरू किया इसकी उपलब्ध जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।
तत्पश्चात *नरपाल जी, कामराज जी, बक्शाजी अथवा बोहितराज तथा ताहड़ जी* ने गणराज्य का शासन भार संभाला।
नरपाल जी व कामराज जी की शासनावधि अल्पसमय ही रही।
तत्पश्चात बोहितराज जी ने शासन भार संभाला। बोहितराज कितने भाई थे तथा उन्होने कब से शासन कार्य शुरू किया इसकी उपलब्ध जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।
*==बोहितराज या बक्सा जी धौळिया==*
वीर तेजाजी महाराज से संबंधित अनेक लेखकों द्वारा लिखित संक्षिप्त जीवनीयों, आम बोल चाल की वार्ताओं तथा वर्तमान समय में तेजाजी पर गाये जाने वाले गीतों में तेजाजी के पिता जी का नाम बक्साजी लिखा व बोला जातै है। मगर यह सरासर गलत और भ्रांतीपूर्ण है।
वीर तेजाजी के वंश के *भाट भैरूराम डेगाना* की पोथी में तेजाजी तक 21 पीढीयों का नाम दिया गया है, जिसमें तेजाजी के पिता का नाम *ताहड़ जी (थिरराज जी)* व दादाजी का नाम *श्री बोहतराज जी (बक्साजी)* अंकित है।
और यही प्रमाणिक सत्य है।
और आप सभी आधुनिक लेखकों से भी अनुरोध हे कि इस सत्य को हि अपने लेखन में जगह देवें।
साथ ही वर्तमान गायकों से निवेदन है कि अपने नवगीतों में किसी भी प्रकार की भ्रांती फैलाने से बच के रहें।
मेरे युवा साथियों आप तेजाजी के इतिहास को मानस पटल पर अंकित कर लेवें। अगर कहीं भी किसी लेखक या गायक द्वारा तेजाजी महाराज के इतिहास में कोई विरोधाभास दिखे तो उसका तुरंत विरोध करें।
वीर तेजाजी महाराज से संबंधित अनेक लेखकों द्वारा लिखित संक्षिप्त जीवनीयों, आम बोल चाल की वार्ताओं तथा वर्तमान समय में तेजाजी पर गाये जाने वाले गीतों में तेजाजी के पिता जी का नाम बक्साजी लिखा व बोला जातै है। मगर यह सरासर गलत और भ्रांतीपूर्ण है।
वीर तेजाजी के वंश के *भाट भैरूराम डेगाना* की पोथी में तेजाजी तक 21 पीढीयों का नाम दिया गया है, जिसमें तेजाजी के पिता का नाम *ताहड़ जी (थिरराज जी)* व दादाजी का नाम *श्री बोहतराज जी (बक्साजी)* अंकित है।
और यही प्रमाणिक सत्य है।
और आप सभी आधुनिक लेखकों से भी अनुरोध हे कि इस सत्य को हि अपने लेखन में जगह देवें।
साथ ही वर्तमान गायकों से निवेदन है कि अपने नवगीतों में किसी भी प्रकार की भ्रांती फैलाने से बच के रहें।
मेरे युवा साथियों आप तेजाजी के इतिहास को मानस पटल पर अंकित कर लेवें। अगर कहीं भी किसी लेखक या गायक द्वारा तेजाजी महाराज के इतिहास में कोई विरोधाभास दिखे तो उसका तुरंत विरोध करें।
*==बक्सा जी धौळिया==*
संत कानाराम जी ने बक्सा जी धौळिया नाम के संबंध में काफी खौज खबर जिसमें यही साबित हुआ की बोहितराज जी ही बक्सा जी थे, और तेजाजी महाराज के दादाश्री थे।
जैसा कि ग्रामीण परिवेश में प्रत्येक व्यक्ति के दो नाम अमूमन देखने को मिलते हैं उसी भांती बोहतराज जी का आम बोलचाल में बक्सा जी नाम स्वीकार्य किया गया है।
संत कानाराम जी ने बक्सा जी धौळिया नाम के संबंध में काफी खौज खबर जिसमें यही साबित हुआ की बोहितराज जी ही बक्सा जी थे, और तेजाजी महाराज के दादाश्री थे।
जैसा कि ग्रामीण परिवेश में प्रत्येक व्यक्ति के दो नाम अमूमन देखने को मिलते हैं उसी भांती बोहतराज जी का आम बोलचाल में बक्सा जी नाम स्वीकार्य किया गया है।
*==बक्सा जी के पुत्र==*
भाट भैंरूराम डेगाना की पोथी में बक्सा जी के सात पुत्रों का नाम सहित उल्लेख मिलता है। जिसमें से वीर तेजाजी महाराज के पिताजी श्री ताहड़ जी सबसे बड़े पुत्र थे।
इस प्रकार तेजाजी के 6 काकाओं का उल्लेख इस पोथी में है।
*मेरे आदर्श लेखक स्वर्गीय मनसुख जी रणवां जी* ने बक्साजी को तेजाजी का ताऊ लिखा है। यह प्रमाणित नहीं हो पाया।
भाट भैंरूराम डेगाना की पोथी में बक्सा जी के सात पुत्रों का नाम सहित उल्लेख मिलता है। जिसमें से वीर तेजाजी महाराज के पिताजी श्री ताहड़ जी सबसे बड़े पुत्र थे।
इस प्रकार तेजाजी के 6 काकाओं का उल्लेख इस पोथी में है।
*मेरे आदर्श लेखक स्वर्गीय मनसुख जी रणवां जी* ने बक्साजी को तेजाजी का ताऊ लिखा है। यह प्रमाणित नहीं हो पाया।
*==ताहड़ जी का शासन भार संभालना==*
अपनी वृद्धावस्था के दौरान बक्सा जी ने अपने गणराज्य की प्रजा से रायशुमारी कर तथा सभी के सुझाव को मानते हुए ताहड़ जी को अपना उत्तराधिकारी बनाया।
जाट शासक सदैव ही गणतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करते आये हैं। जाट गणराज्यों में अन्य जातियों की तरह राजनीतिक षड़्यंत्र देखने को नहीं मिलता।
तभी तो सभी भाईयों में छोटे होने पर भी ताहड़ जी ने वीर तेजाजी महाराज को उनकी योग्यता, काबिलियत तथा उनकी वीरता को देखते हुए अपना युवराज घोषित किया। इस पर एक भी बड़े भाई ने आपत्ति नहीं की और ना ही भाईयों में होने वाले कलंकित युद्ध व षड़्यंत्र हुए। बल्कि सभी ने वीर तेजाजी महाराज के संरक्षक के रूप में कार्य किया।
अपनी वृद्धावस्था के दौरान बक्सा जी ने अपने गणराज्य की प्रजा से रायशुमारी कर तथा सभी के सुझाव को मानते हुए ताहड़ जी को अपना उत्तराधिकारी बनाया।
जाट शासक सदैव ही गणतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करते आये हैं। जाट गणराज्यों में अन्य जातियों की तरह राजनीतिक षड़्यंत्र देखने को नहीं मिलता।
तभी तो सभी भाईयों में छोटे होने पर भी ताहड़ जी ने वीर तेजाजी महाराज को उनकी योग्यता, काबिलियत तथा उनकी वीरता को देखते हुए अपना युवराज घोषित किया। इस पर एक भी बड़े भाई ने आपत्ति नहीं की और ना ही भाईयों में होने वाले कलंकित युद्ध व षड़्यंत्र हुए। बल्कि सभी ने वीर तेजाजी महाराज के संरक्षक के रूप में कार्य किया।
*==बक्सा जी वीर तेजाजी महाराज के संरक्षक के रूप में==*
लगभग 50-55 वर्ष की उम्र में वीर तेजाजी महाराज की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या धौखे से हुई जिसमें जायल के डाकू "बाला" व चांग के मिणाओं का सरदार 'डाकू कालिया' था कि भूमिका रही।
*(इस घटना की जानकारी फिर कभी विस्तार से आप सभी तक पहुंचाऊंगा)*
अपने पिताजी व खरनाल के गणपति ताहड़ जी धौळिया की हत्या के समय वीर तेजाजी महाराज मात्र 9 वर्ष के थे तथा अपने ननिहाल त्यौद में मामओं के संरक्षण में रहकर अस्त्र शस्त्र, घुड़सवारी, युद्ध कौशल व शास्त्र ज्ञान ग्रहण कर रहे थे।
अपने भाइयों में सबसे कुशल ताहड़ जी ही थे। दूसरी तरफ ताहड़ जी के पुत्र भी प्रशासन को संभाल पाने के लिए उपयुक्त नहीं थे क्योंकि वे किसान की भांति ही रहे हुए थे।
अन्य जातियों के राजकुमारों की तरह जाटों के राजकुमार विलासी नहीं रहे कभी। चाहे वे राजकुमार हो मगर आम जनता की तरह ही खेती व पशुपालन का काम करते थे।
लगभग 50-55 वर्ष की उम्र में वीर तेजाजी महाराज की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या धौखे से हुई जिसमें जायल के डाकू "बाला" व चांग के मिणाओं का सरदार 'डाकू कालिया' था कि भूमिका रही।
*(इस घटना की जानकारी फिर कभी विस्तार से आप सभी तक पहुंचाऊंगा)*
अपने पिताजी व खरनाल के गणपति ताहड़ जी धौळिया की हत्या के समय वीर तेजाजी महाराज मात्र 9 वर्ष के थे तथा अपने ननिहाल त्यौद में मामओं के संरक्षण में रहकर अस्त्र शस्त्र, घुड़सवारी, युद्ध कौशल व शास्त्र ज्ञान ग्रहण कर रहे थे।
अपने भाइयों में सबसे कुशल ताहड़ जी ही थे। दूसरी तरफ ताहड़ जी के पुत्र भी प्रशासन को संभाल पाने के लिए उपयुक्त नहीं थे क्योंकि वे किसान की भांति ही रहे हुए थे।
अन्य जातियों के राजकुमारों की तरह जाटों के राजकुमार विलासी नहीं रहे कभी। चाहे वे राजकुमार हो मगर आम जनता की तरह ही खेती व पशुपालन का काम करते थे।
इस प्रकार ताहड़जी की असमयिक मृत्यु व वीर तेजाजी महाराज के अल्पायु होने के कारण राज्य में संकट के बादल छा गये। तब प्रजा ने एक स्वर में कहा कि *'बोहतराज' जी को ही पुन: गणपति व तेजाजी के व्यस्क होने तक उनका संरक्षक बनाया जाये।* अपनी प्यारी जनता की राय को सर आंखो पर रखकर 'बक्सा जी' पुनः गणपति पद पर आसीन हुए।
और यहीं से बक्सा जी का तेजाजी के पिता होने की भ्रांति हमारी पीढी तक पहुंची।
बक्सा जी वीर तेजाजी महाराज के दादाजी थे और यही सत्य है। वीर तेजाजी के संरक्षक के रूप में होने के कारण आधुनिक लेखकों द्वारा उन्हें तेजाजी के पिता समझ लिया गया।
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प्रिय बंधुओं बक्सा जी के बारे में लिखित इतिहास ना के बराबर उपलब्ध है मगर मेरे गुरु व शोधकर्ता संत कान्हाराम जी व मैंने तेजाजी के ज्ञात इतिहास से संबद्ध कर तथा कुछ अपने स्तर पर दिमागी कसरत करके तात्कालिक घटनाओं को एकसूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। इन घटनाओं व इतिहास थौड़ी बहुत खामी रह सकती है मगर तेजाजी महाराज के इतिहास को देखते हुए ये घटनाएं सत्य है इसका हम दावा कर सकते हैं।
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*वीर तेजाजी महाराज के इतिहास अगली कड़ी में हम तेजाजी के माता (रामकुंवरी व रामी) पिता (ताहड़जी) के विवाह व तेजाजी के बड़े भाईयों के संबंध में चर्चा करेंगे।*
और यहीं से बक्सा जी का तेजाजी के पिता होने की भ्रांति हमारी पीढी तक पहुंची।
बक्सा जी वीर तेजाजी महाराज के दादाजी थे और यही सत्य है। वीर तेजाजी के संरक्षक के रूप में होने के कारण आधुनिक लेखकों द्वारा उन्हें तेजाजी के पिता समझ लिया गया।
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प्रिय बंधुओं बक्सा जी के बारे में लिखित इतिहास ना के बराबर उपलब्ध है मगर मेरे गुरु व शोधकर्ता संत कान्हाराम जी व मैंने तेजाजी के ज्ञात इतिहास से संबद्ध कर तथा कुछ अपने स्तर पर दिमागी कसरत करके तात्कालिक घटनाओं को एकसूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। इन घटनाओं व इतिहास थौड़ी बहुत खामी रह सकती है मगर तेजाजी महाराज के इतिहास को देखते हुए ये घटनाएं सत्य है इसका हम दावा कर सकते हैं।
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*वीर तेजाजी महाराज के इतिहास अगली कड़ी में हम तेजाजी के माता (रामकुंवरी व रामी) पिता (ताहड़जी) के विवाह व तेजाजी के बड़े भाईयों के संबंध में चर्चा करेंगे।*
*~ जय वीर तेजाजी ~*
> *लेखक*
*बलवीर घिंटाला तेजाभक्त बूड़सू*
मकराना नागौर
9414980415
*बलवीर घिंटाला तेजाभक्त बूड़सू*
मकराना नागौर
9414980415
*संत कान्हाराम (अध्यापक)*
सुरसुरा, अजमेर
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सुरसुरा, अजमेर
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