जंग का ऐलान हुआ तो मैं भी जाऊंगा लडऩे... इस बार गया तो 100 को मारकर आऊंगा...'

सीकर. ये हैं दिगेन्द्र सिंह। बहादुर फौजी। पाक की नापाक हरकत से इनका भी खून खौल रहा है। 1999 के करगिल युद्ध ने इन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए पाकिस्तान की फौज को धूल चटा दी थी। 5 गोलियां खाकर भी सीकर जिले के गांव झालरा का यह फौजी बेटा हिन्दुस्तान को करगिल में विजय मिलने तक लड़ता रहा। ..

रिटायर होने के बाद भी देश की रक्षा का जज्बा इनमें कूट-कूटकर भरा हुआ है। राजस्थान पत्रिका डॉट कॉम से बातचीत में इन्होंने कहा कि इस बार जंग हुई तो ये लडऩे के लिए बॉर्डर पर जरूर जाएंगे। इसके लिए भले ही भारत सरकार या इनकी बटालियन आदेश दे या नहीं दे, मगर जिस दिन युद्ध की घोषणा होगी ये बिस्तर उठाकर अपनी बटालियन के पास चले जाएंगे और उनसे युद्ध लडऩे की अनुमति लेने की हर संभव कोशिश करेंगे।

47 वर्षीय दिगेन्द्र सिंह 2005 में रिटायर हो चुके हैं, मगर खुद को अब भी युद्ध लडऩे के काबिल मानते हैं।
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सेना की सबसे बेहतरीन बटालियन 2 राजपूताना रायफल्स में थे दिगेन्द्र सिंह।
-करगिल युद्ध में दिगेन्द्र सिंह ने चाकू से पाकिस्तान के मेजर अनवर का सिर काटकर उसमेंं तिरंगा फहरा दिया था।
-1999 में दिगेन्द्र ने कुल 48 पाकिस्तानी फौजी व घुसपैठिए मारे थे। इस बार इनका इरादा सौ के आंकड़े को पार करने का है।
-दिगेन्द्र सिंह कहते हैं कि मेरे पास युद्ध का तर्जुबा है। लडऩे भी नहीं दिया गया तो मैं मेरे साथी फौजियों को बचा तो सकता हूँ।
-करगिल युद्ध में दिगेन्द्र सिंह के सीने में 3, हाथ व पैर में एक-एक गोली लगी थी।
-युद्ध के बाद दिगेन्द्र सिंह को राष्ट्रपति ने महावीर चक्र से नवाजा था।
-दिगेन्द्र कुमार को इंडियन आर्मी को बेस्ट कोबरा कमांडो के रूप में भी जाना जाता था।

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