जय वीर तेजाजी बंधुओं..
..
आज तेजाजी महाराज के पूर्वजों की जानकारी आपको देने का प्रयास करूंगा। किसी भी प्रकार की त्रुटी हो अथवा इसके अलावा कोई नवीन तथ्य या जानकारी आपके पास उपलब्ध हो तो प्रत्युत्तर में अवश्य बतायें।
...
जैसा की आप जानते हैं वीर तेजाजी महाराज नागवंशी जाट थे।
प्राचीन आर्यों के मूल रूप से चार वंश थे। जिसमें से एक मुख्य वंश 'नागवंश' था। इस नागवंश की 9 ज्ञात शाखाएं मानी गई है। इन्हीं नौ शाखाओं में से एक थी- श्वेतनाग शाखा।
ईसी शाखा से तेजाजी के पूर्वज संबंधित थे।
जैसा की मारवाड़ क्षैत्र में सफेद को धौळा कहा जाता है। उसी तरह श्वेतनाग से धौळिया नाग शब्द का प्रचलन शुरू हो गया। जब तेजाजी पूर्वज मध्य भारत से मारवाड़ की तरफ आये तो वे श्वेतनाग जाट से धौळीया गौत्री नागवंशी जाट के रूप में मारवाड़ के जायल क्षैत्र में आबाद हुए।
यहां के मूलनिवासी काला गौत्री जाट थे जिनके 27 गांव आबाद थे। जो कि प्राचीन काल से बसे थे और यहां की भूपती थे।
जब धौलिया गौत्री जाटों ने जायल में बसना चाहा तो राजनीतक कारणों के चलते काला गौत्री जाटों से उनका संघर्ष हुआ। इस झगड़े में जीत धौळियों की हुई मगर दुश्मनी का यह बीज सदीयों तक निरंतर प्रस्फुट्टित होता रहा। (इसी कुंठावश काला गौत्री जाटों ने जायल के खींचियों के साथ मिलकर तेजाजी के पूर्वजों के संबंध में उलजुलूल व मनगढंत कहानियां फैलायी। जिसके परिणामस्वरूप तेजाजी को राजपूत तक घौषित कर दिया। और दुर्भाग्य देखो आज के कुछ नासमझ जाट भी इस भ्रांती का भूसा दिमाग में लिये घूम रहे हैं)
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आज तेजाजी महाराज के पूर्वजों की जानकारी आपको देने का प्रयास करूंगा। किसी भी प्रकार की त्रुटी हो अथवा इसके अलावा कोई नवीन तथ्य या जानकारी आपके पास उपलब्ध हो तो प्रत्युत्तर में अवश्य बतायें।
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जैसा की आप जानते हैं वीर तेजाजी महाराज नागवंशी जाट थे।
प्राचीन आर्यों के मूल रूप से चार वंश थे। जिसमें से एक मुख्य वंश 'नागवंश' था। इस नागवंश की 9 ज्ञात शाखाएं मानी गई है। इन्हीं नौ शाखाओं में से एक थी- श्वेतनाग शाखा।
ईसी शाखा से तेजाजी के पूर्वज संबंधित थे।
जैसा की मारवाड़ क्षैत्र में सफेद को धौळा कहा जाता है। उसी तरह श्वेतनाग से धौळिया नाग शब्द का प्रचलन शुरू हो गया। जब तेजाजी पूर्वज मध्य भारत से मारवाड़ की तरफ आये तो वे श्वेतनाग जाट से धौळीया गौत्री नागवंशी जाट के रूप में मारवाड़ के जायल क्षैत्र में आबाद हुए।
यहां के मूलनिवासी काला गौत्री जाट थे जिनके 27 गांव आबाद थे। जो कि प्राचीन काल से बसे थे और यहां की भूपती थे।
जब धौलिया गौत्री जाटों ने जायल में बसना चाहा तो राजनीतक कारणों के चलते काला गौत्री जाटों से उनका संघर्ष हुआ। इस झगड़े में जीत धौळियों की हुई मगर दुश्मनी का यह बीज सदीयों तक निरंतर प्रस्फुट्टित होता रहा। (इसी कुंठावश काला गौत्री जाटों ने जायल के खींचियों के साथ मिलकर तेजाजी के पूर्वजों के संबंध में उलजुलूल व मनगढंत कहानियां फैलायी। जिसके परिणामस्वरूप तेजाजी को राजपूत तक घौषित कर दिया। और दुर्भाग्य देखो आज के कुछ नासमझ जाट भी इस भ्रांती का भूसा दिमाग में लिये घूम रहे हैं)
काला जाटों से कभी न खत्म होने वाले इस झगड़े को देखते हुए तथा कालों पर रहम करके धौळिया जाट औसीयां-नागौर सीमा पर स्थित गांव करणू (धौलीडेह) में निवासित हुए।
(डेहर/डेह/बाढ यह एक समतल खेत का प्रकार होता है। जो पशुचारण व खेती के लिए प्रयोग में लिया जाता है।)
इसी कारण यह क्षैत्र "धौळियों की डेह" अर्थात् "धौळीडेह" कहलाया।
मगर यह क्षैत्र समृद्ध ना समझते हुए तेजाजी के षड़दादा व धौळिया जाटों के 16 वीं पीढी के भूपति उदयराज जी धौळिया ने वर्तमान खरनाल (पूर्व में करनाल भी) के खौजा व खौखर जाटों को पराजीत कर अपना गणराज्य स्थापित किया।
उधर काला जाटों का जायल के पास के बडीयासर जाटों के साथ भीषण रक्तपात हुआ, जिसमें काला जाटों के समस्त खेड़े उजाड़ दिये गये।
यह युद्ध खींयाला का युद्ध कहलाता है। यह युद्ध लगभग 1350-1450 के मध्य में हुआ था। अवश्य ही खींयाळा अत्यधिक भीषण युद्ध रहा होगा क्योंकि यह युद्ध दो जाट शक्तियों के मध्य हुआ था। मगर यह युद्ध इतिहास में अंकित नहीं है..क्योंकि तब का जाट अनपढ था और अभी का जाट सोया हुआ। जो यह प्रयत्न जानने का प्रयत्न ही नहीं करना चाहता कि हमारे पूर्वज क्या थे।
तो बंधुओं इस युद्ध में काला जाटों की निर्णायक हार हुई और उसके बाद काला जाट जायल क्षैत्र को छौड़कर चले गये और दूर के गांवो में बंटकर रहने लगे। आज जायल क्षैत्र में बडीयासर जाटों का अच्छा
कुनबा है। कई सौ गांवो में बडियासर जाट निवास करते हैं। 8-10 गांव पूर्ण रूप से बडियासर जाटों के है।
खिंयाळा गांव व कंवरसी तालाब के पास कंवरसी झाड़ी व गांव में आज भी खिंयाळा युद्ध के जांबांज जाटों के देवळे मौजूद है।
.......
अब लौटते है फिर से तेजाजी के पूर्वजों की और...
..
जैसा कि अब तक पढा तेजाजी के षड़दादा उदयराज जी ने खरनाल परगने को अपनी राजधानी बनाया। और एक अच्छे गणपति के रूप में अपने गणराज्य को चलाया।
उनके बाद के गणपति निम्न प्रकार से थे।
उदयराज > नरपाल > कामराज > बोहितराज (बक्साजी) > ताहड़देव (थिरराज) > तेजराज (तेजाजी)
(यह वंशावली धौलिया जाटों के भाट भैंरूराम की पौथी में बाकायदा लिपिबद्ध है)
----
बक्साजी कौन थे?
बक्साजी तेजाजी महाराज के पिता थे या दादा?
बक्साजी अगर दादा थे तो उनका नाम तेजाजी से क्यूं जौड़ा जाता है?
बक्साजी के पुत्र कौन कौन थे?
(डेहर/डेह/बाढ यह एक समतल खेत का प्रकार होता है। जो पशुचारण व खेती के लिए प्रयोग में लिया जाता है।)
इसी कारण यह क्षैत्र "धौळियों की डेह" अर्थात् "धौळीडेह" कहलाया।
मगर यह क्षैत्र समृद्ध ना समझते हुए तेजाजी के षड़दादा व धौळिया जाटों के 16 वीं पीढी के भूपति उदयराज जी धौळिया ने वर्तमान खरनाल (पूर्व में करनाल भी) के खौजा व खौखर जाटों को पराजीत कर अपना गणराज्य स्थापित किया।
उधर काला जाटों का जायल के पास के बडीयासर जाटों के साथ भीषण रक्तपात हुआ, जिसमें काला जाटों के समस्त खेड़े उजाड़ दिये गये।
यह युद्ध खींयाला का युद्ध कहलाता है। यह युद्ध लगभग 1350-1450 के मध्य में हुआ था। अवश्य ही खींयाळा अत्यधिक भीषण युद्ध रहा होगा क्योंकि यह युद्ध दो जाट शक्तियों के मध्य हुआ था। मगर यह युद्ध इतिहास में अंकित नहीं है..क्योंकि तब का जाट अनपढ था और अभी का जाट सोया हुआ। जो यह प्रयत्न जानने का प्रयत्न ही नहीं करना चाहता कि हमारे पूर्वज क्या थे।
तो बंधुओं इस युद्ध में काला जाटों की निर्णायक हार हुई और उसके बाद काला जाट जायल क्षैत्र को छौड़कर चले गये और दूर के गांवो में बंटकर रहने लगे। आज जायल क्षैत्र में बडीयासर जाटों का अच्छा
कुनबा है। कई सौ गांवो में बडियासर जाट निवास करते हैं। 8-10 गांव पूर्ण रूप से बडियासर जाटों के है।
खिंयाळा गांव व कंवरसी तालाब के पास कंवरसी झाड़ी व गांव में आज भी खिंयाळा युद्ध के जांबांज जाटों के देवळे मौजूद है।
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अब लौटते है फिर से तेजाजी के पूर्वजों की और...
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जैसा कि अब तक पढा तेजाजी के षड़दादा उदयराज जी ने खरनाल परगने को अपनी राजधानी बनाया। और एक अच्छे गणपति के रूप में अपने गणराज्य को चलाया।
उनके बाद के गणपति निम्न प्रकार से थे।
उदयराज > नरपाल > कामराज > बोहितराज (बक्साजी) > ताहड़देव (थिरराज) > तेजराज (तेजाजी)
(यह वंशावली धौलिया जाटों के भाट भैंरूराम की पौथी में बाकायदा लिपिबद्ध है)
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बक्साजी कौन थे?
बक्साजी तेजाजी महाराज के पिता थे या दादा?
बक्साजी अगर दादा थे तो उनका नाम तेजाजी से क्यूं जौड़ा जाता है?
बक्साजी के पुत्र कौन कौन थे?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर वीर तेजाजी के आशीर्वाद से जल्द ही आप तक पहुंचाने का प्रयास करूंगा।
~ जय वीर तेजाजी ~
~ जय वीर तेजाजी ~

मै देवताओं को जातिवाद मे नही बांटना चाहता हूँ तेजा जी एक महापुरुष थै। ऐसा वचनबंन्द इस धरती पर नही हुआ जैस तेजाजी महाराज थै। लेकिन क्या आप उदयराज जी की पीढी बता पाओगे क्या यह बता पाओगे की तेजा जी के पिता विर तहाङदेव जी किस युध्द में विर गति हुए जरूर बताना
जवाब देंहटाएंइतिहास बोल रहा है कि विर शिरोमणि तेजा जी महाराज के पूर्वज मध्यप्रदेश की खिलचिपुर ,राघोवगढ ,गढकिला रियासत से चौहान खिंची वंशज राजस्थान मे राजधानी बनाई सांभर को और राज किया जिसमे बेङ बेङ शूरवीर हुए अंगपाल जो हिन्दू सम्राट् प्रथ्वीराज का नाना भी इसी वंश नांगवीशय था। तथा बाद मे जायल की स्थापना सांभर के वंशज माणकलाल खिंची ने स्थापना कि 960 ईस्वी के आस पास तथा उनकी छठी पीठी गन्दलराव शासक उसकी तीसरी पीढी उदयराव थै। जिसने काला नाम कबिल को पराजित कर 24 गांवो की जागीदारी धोलिया गांव मे स्थापित कि थी। तथा पौत्र बहोतराव उनके बाद जागीरदार बने तथा तेजा जी के पिता तहाङराव की शादी सोढा वंश के क्षैत्रिय कुल मे हुई तथा कुछ समय बाद मुगल आक्रमणकारि ने सांभर पर हमला कर दिया और अछित्रपुर राजधानी नहीं थी उस समय सांभर राजधानी थी चौहान शासको की उस युध्द मे तेजाजी के पिता युध्द मे विर गति हो गये। और उनकी देख रख दादा ने कि और सांभर के चौहान शासको के अधिन मे देख रेख हुई । आप सोचो कि उस समय सामान्य व्यक्ति के नाम के पीछ कुंवर नहीं लगा सकता था केवल राजा के पुत्र या फिर जागीरदार के लगा सकता था जैस आज के जमान मे हर कोई क्लकेटर नहीं लगा सकता उसी प्रकार यह जनता प्यार से केवल जागीरदार के बेटे को बोलती थी। उस समय घोङी बहुत बङी चीज होती थी आज जैस कोई अपने घर मे हवाई जहाज हर कोई नहीं रख सकता उसी प्रकार उस जमान मे हर कोई घोङी नहीं रख सकता बहुत ही धनवान या फिर राजा होता उसके पास ही होती 1000 बर्ष पहले घोङी हम यह मानते है वो देव पुरूष थै भगवान के अवतार थै लेकिन सोचो । हाँ यह बात है कि जहां मध्यप्रदेश से तेजा जी के पूर्वज आये वहां आज भी खिलचिपुर मे खिंची चौहान राजवंश है प्रियव्रत सिंह मंत्री है काग्रेस मे और राघोवगढ के राजा काग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह खिंची आज भी है। मेरी बात से किसी बात से दिल दुखा तो माफी चाहता हूँ । अगर आपको तकलिफ होती है और मेरी बात गलत है तो मै मेरा post delet कर दुगा । मेरा कहने का मतलब जाट राजपुत एक ही वंश से है हम भी की पीढी कहीना कही आकर मिल जाति है। हम सब भाई
जवाब देंहटाएंहै। बात मैन तेजा जी का इतिहास देख कर की कुछ गलत लिख दिया तो sorry किसी का दिल नहीं दुखना चाहिए message कर देना मे post delet कर दुगा
वंशावली कहती है कि तेजाजी खिंची क्षत्रिय थे
जवाब देंहटाएंसंत महात्मा और महापुरुष और सैनिक सबके होते हैं। उन्हें किसी जाति के दायरे में बांधना मुझे ठीक नहीं लगता। राजस्थान में जाट राजपूतों को आपस में लड़ाने का षड़यंत्र राजनीतिक लोग आजादी के बाद से ही करने में लगे रहते हैं। चंद भोले भाले लोग उनके चंगुल में आकर भाईचारा और सामाजिक समरसता को तोड़ने में शामिल हो जाते हैं।
गांवों में साथ रहने वाली दोनों ही कौमें खेती और पशुपालन व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं। खासतौर पर चुनावों के समय आपस में भड़काने और लडाने का काम जोरों पर चलता है। मेरा मानना है कि तमाम षड़यंत्र और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों ही समाज में गांवों में भाईचारा और सद्भाव पीढ़ियों से कायम है।
नागौर के खरनाल में कल जाट समाज के आराध्य लोकदेवता तेजाजी महाराज की जयंती मनाई गई। इस दौरान पहली बार वीर तेजाजी के धौलिया गौत्र के भाट किशनगढ़ में रहने वाले बजरंगलाल जी को ऐतिहासिक वंशावली के साथ बुलाया गया। वहां हज़ारो लोगों की मौजूदगी में एक हजार साल पुरानी इस वंशावली का पहली बार वाचन किया गया।
इसमें लोककथाओं और दंत कथाओं के इतर नई ऐतिहासिक जानकारी सामने आई। दैनिक भास्कर अखबार में कल बैठक की लाइव कवरेज आज के अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित की है।
एक हजार साल पुरानी वंशावली वाचन में तेजाजी महाराज के जन्म और भाइयों की संख्या के बारे में भी ऐतिहासिक साक्ष्य लोगों के सामने आए।
सबसे खास बात ये रही कि वंशावली से जाट समाज के लोगों को पता चला कि तेजाजी महाराज खींची राजपूत थे। नाम के पीछे धौलिया गौत्र लगाते थे।
तेजाजी के वंशज धौलिया जाट है। तेजाजी वचन के पक्के गौभक्त थे।
विषय ये नहीं है कि उनकी जाति राजपूत थी, विषय ये है कि आप सभी की जड़ों को देखोगे तो पता चलेगा कि हम सब एक ही है। कोई फर्क नहीं है।
19 feb 2019 rajsthan patrika-Nagaur read karein
जवाब देंहटाएंRight hai tejaji khinchi Rajput hi they aur yeh Kala Jaat gora Jaat ki khaniya Bana rahe hai
जवाब देंहटाएंवीर तेजाजी महाराज जाट जाति से थे
जवाब देंहटाएं