राजस्थान की जाट विभूतियां

जय वीर तेजाजी की बंधुओं..

एक बहुत छोटी मगर सारगर्भित, एतिहासिक व जीवनोपयोगी बात बताना चाहूंगा।

क्या आपने कभी सोचा है, कि वीर तेजाजी महाराज की किसी भी फोटो अथवा मूर्ती में सदैव लीलण सखी का अगला पैर ऊपर क्यों दिखाया जाता है?

मैंने कुछ मित्रों से पूछा तो बोले महाराणा प्रताप के चेतक का भी तो उपर है।

अब उन भौले मानसों को कौन समझाये की तेजाजी महाराज तो प्रताप से 500 बरस पहले ही इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गये थे। कहां वीर तेजाजी और कहां प्रताप।....

मित्रों सर्प/नाग जाती के जीवों की एक मर्यादा होती है कि वे चौपायों (चार पावों वाली वस्तु या जीव) पर कभी नहीं चढा करते।

बड़े बुजुर्ग भी कहतेहै कि कभी भी खाट या कुर्सी पर बैठकर भौजन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से खाट की आण (मर्यादा) टूट जाती है, जिससे नागदेवता खाट पर चढ सकता है।

इसिलिए जब नागदेवता "वीर तेजाजी महाराज" को डसने के लिए तैयार होते है तब दिव्यात्मा सखी लीलण मर्यादा को जीवंत रखने के लिए अपना अगला पैर उठा लेती है, और नागदेवता उस पर असवार होते हैं।

यह जानकारी ऐतीहासिक भी थी और आम जीवन के लिए भी प्रेरणादायक।.....

Balveer Ghintala 'तेजाभक्त'
मकराना नागौर
+91-9414980415

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