आप सभी ने भारत के गांव देहात की अखाड़ों में एक चीज तो जरूर नोटिस करी होगी, वो क्या हो सकती है भला ..?
जी हाँ आपने एकदम ठीक अंदाजा लगाया .."सब के सब वहां मेहनत करने वाले हमेशा "लड़के" ही होते है ना ?आज जिनसे आपकी मुलाकात करवाने जा रहा हूँ उन्हें सन 2007 में भारत सरकार अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित कर चुकी है | इनका नाम "अलका तोमर" है और ये फ्रीस्टाइल कुश्ती की खिलाडी है |जिन्होंने सन 1999 में जब कुश्ती खेलना शुरू किया तब इस खेल को "मर्दाना खेल" कहा जाता था|इनका जन्म ज़िला मेरठ में स्थित सिसोली गाँव में श्री नैन सिंह तोमर के घर हुआ | घर में खेल-कूद का माहौल पहले से ही था,दोनों बड़े भाई मेरठ के दंगलों के नामचीन खिलाडी हुआ करते थे | अलका जी सभी उपलब्दियों के पीछे उनके पिता का महत्वपूरण योगदान रहा है , उन्होंने अलका को भारत देश की दूसरी PT उषा बनाने का सपना संजोया था |अलका स्कूली स्तर तक सभी एथेलेटिक्स प्रतियोगितओं में अवल रहती ,लेकिन नैन सिंह जी को जल्द ही ये अहसास हुआ की अलका और लड़कियों के मुक़ाबले काफी मजबूत है | होती भी क्यों न जाटणी जो थी, रगोंमें पहलवानी खून जो दौड़ रहा था | पिता जी ने अलका को भी पहलवान बनाने का निर्णय किया | शुरुवातीसालों में अलका अपने भाइयों के और पिता जी के साथ ही ट्रेनिंग करती | गाँव से दूर चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में रोज़ प्रैक्टिस करने जाना माउंट एवेरेस्ट चढ़ने से कम नही था | लड़की का पहलवान बनना गांव वालो के साथ साथ माँ श्री मती मुन्नी देवी को भी गंवारा नही था | इससे पहले कीअलका जी के "बाल" खेल में बाधा उत्पन करें और एक अच्छा पहलवान बनने से रोके नैन सिंह जी ने खुद ही उन्हें काट दिया | इस बात के लिए पूरे गांव में उनकी खूब आलोचना हुई | लेकिन नैन सिंह जी के मन में अलका को एक सफल पहलवान बनाने की एक धुन सवार थी | बेटी भी जी-जान लगा कर जुट गई | उस समयलड़कियां खेलों से कोसों दूर रहा करती थी ,जिस कारण अलका अक्सर अपने भाइयों के साथ ही प्रैक्टिस करती |

उस मेहनत का नतीजा जानना चाहंगे ?

1 ) अलका तोमर भारत देश की " प्रथम " ऐसी महिला थी जिन्होंने "Senior World Wrestling चैंपियनशिप्स, Guangzhou चीन (2006 ) में कांस्य पदक जीता था|

2) साल 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय मंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता |

3) साल 2006 दोहा एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता |

4) 2003 -2009 के बीच आयोजित हुए एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में कुल चार पदक जीते (एक रजत और तीन कांस्य पदक ) |
5) 2003 -2011 के बीच आयोजित राष्ट्रीय मंडल चैम्पियनशिप में कुल चार पदक जीते (तीनस्वर्ण और एक रजत पदक) |
6)लगातार 12 सालों तक नेशनल चैंपियन रही |उपलब्दियों की सूची इतनी बड़ी है की जो गांव वाले पहले लड़की के पहलवान बनने की खिलाफ थे वही आज इस बात पर गर्व महसूस करते है कि अलका उनके गांव से है |गाँव वालो की सोच अब बदल गई है और उसकी वजह है “अलका” |जहाँ पहले अखाड़े में एक भी लड़की नही होती थी आज 50 से भी ज्यादा लडकियां प्रैक्टिस करती है |अलका की सफलता की पीछे उनके गुरु श्री जबर सिंह का बहुत योगदान रहा है |अब अलका जी अपने ससुराल में एक आदर्श बहू, पत्नी व मां का फर्ज भी निभा रही है। 

ससुराल से जुडी कुछ रोचक बातें भी बता दूँ

1) इनके पास Masters in Physical education की डिग्री भी है, बोले तोखेलों के साथ साथ इन्होंने अपनी पढ़ाई भी पूरी की |

2) अभी उनका एक 2 साल का बेटा है ,घर ग्रहस्ती संभालने के साथ साथ अलका नौकरी भी करती है और हर रोज़ शाम अपनी प्रैक्टिस भी | उनकी टाइम मैनजमेंट skills के तो सभी कायल है |

3) घर की दीवारे मैडल -ट्रॉफी और कई पुरुस्कार समारोह में मिले सम्मान की photos से सजीहुई है |अलका दीदी आज मेरठ की हज़ारों लड़कियों की आदर्श है ,हर खिलाडी लड़की अलका जी जैसा ही बनाना चाहती है | अलका दीदी ने अकेले ही समाज की उस धकियानूसी और संक्रीण सोच में जैसे बदलाव लाया है, मैं उस बदलाव से काफी प्रभावित हुआ हूं|अलका तोमर जैसे आदर्श उदहारण ही इस समाज को चाहिए, जो न जाने कितनी ही सदियों से बेटियों को बोझ,अपशगुन, पराया धन और न जाने क्या क्या कह कर कोसता चला आ रहा है .                          Balveer Ghintala 'तेजाभक्त'
                  मकराना नागौर
                  +91-9414980415

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